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Thursday, February 26, 2015

ऑस्कर 2015 - दो महिलाएं, दो पुरस्कार, दो भाषण और फ़र्क!

ऑस्कर श्रृंखला की इस विशेष पेशकश में आज पढ़िए, ऑस्कर 2015 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री के पुरस्कारों से सम्मानित दो अभिनेत्रियों की ऑस्कर रिसेप्शन स्पीच...हालांकि पहले हम पढ़वा रहे हैं, जूलियाना मूर की स्पीच, जो उन्होंने स्टिल एलिस  के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार पाने के बाद दी...लेकिन इस से भी ज़्यादा अहम भाषण है, सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री के तौर पर ऑस्कर जीतने वाली पैट्रीशिया ऑरक्वेट का, जिन्होंने ऑस्कर के मंच का सिनेमा में लैंगिक असमानता के विरुद्ध शानदार इस्तेमाल किया...तो पढ़िए और सुनिए, यह दो भाषण...

जूलियाना मूर का ऑस्कर भाषण (Oscar Speech of Julianne Moore)

जूलियाना मूर को फिल्म स्टिल एलिस में एक अल्ज़ाइमर पीड़िता की भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का ऑस्कर मिला है।


"Thank you so much. I read an article that said that winning an Oscar could lead to living five years longer. If that’s true, I’d really like to thank the Academy because my husband is younger than me.

There’s no such thing as best actress, as is evidenced by the performances of my fellow nominees. I’ve been honored to be among you every step of the way. I am grateful for this and grateful for the opportunity to stand up here and thank people that I love.

My manager Evelyn O’Neill, Kevin Huvane, Steven Huvane, Josh Lieberman, my family, my grandparents, my brother Peter, my sister Valerie, my mother and father who told me that I could be whatever I wanted to be if I got an education. Although, I didn’t think they meant being an actress. And I thank my dad for showing me the world. I want to thank everybody who made this movie: Sony Classics, Killer Films, James Brown, Lex Lutzus, Lisa Genova, Kristen Stewart, Alec Baldwin.

I’m so happy - I’m thrilled actually that we were able to hopefully shine a light on Alzheimer’s disease. So many people with this disease feel isolated and marginalized and one of the wonderful things about movies is it makes us feel seen and not alone. And people with Alzheimer’s deserve to be seen, so that we can find a cure.

And finally, to our filmmakers, Wash Westmoreland and Richard Glatzer, who had hoped to be here tonight but they can’t because of Richard’s health. When Richard was diagnosed with ALS, Wash asked him what he wanted to do. Did he want to travel? Did he want to see the world? And he said that he wanted to make movies and that’s what he did.


And, finally, for my husband Bart and our children, Cal and Liv, thank you for my life. Thank you for giving me a home. Thank you very much for this."

लेकिन असल तहलका यह नहीं था। अकादमी अवार्ड समारोह में, सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री के पुरस्कार को लेने जब पैट्रीशिया आरक्वेट जब पोडियम पर पहुंची, तो किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी, कि उनका भाषण क्या मोड़ लेगा। पैट्रीशिया ने पहले तो सामान्य सा अभिवादन और धन्यवाद किया लेकिन उसके बाद हॉलीवुड समेत दुनिया भर में महिला कलाकारों के साथ होने वाले भेदभाव की बखिया उधेड़ कर रख दी। पैट्रीशिया के भाषण की महत्ता को समझते हुए, हम आपके लिए उसका हिंदी अनुवाद भी पेश कर रहे हैं।

पैट्रीशिया आरक्वेट का ऑस्कर भाषण (Oscar Speech of Patrecia Arquette)


"Okay, Jesus. Thank you to the Academy, to my beautiful, powerful nominees.
 To IFC, Jonathan Sehring, John Sloss, Cathleen Sutherland, Molly Madden, David DeCamillo, our  whole cast and our crew.
 My Boyhood family, who I love and admire. Our brilliant director Richard Linklater. The  impeccable Ethan Hawke. My lovelies, Ellar Coltrane, Lorelei Linklater. Thomas and Paul, thank  you for giving me my beautiful children. Enzo and Harlow, you’re the deepest people that I know.
 My friends who all work so hard to make this world a better place. To my parents, Rosanna,  Richmond, Alexis and David.
 To my favorite painter in the world, Eric White, for the inspiration of living with a genius. To my  heroes, volunteers and experts who have helped me bring ecological sanitation to the developing  world with GiveLove.org.
To every woman who gave birth, to every taxpayer and citizen of this nation, we have fought for everybody else’s equal rights. It’s our time to have wage equality once and for all and equal rights for women in the United States of America."

"ओके, जीसस। अकादमी और मेरे साथ नामांकित, ख़ूबसूरत और क़ाबिल कलाकारों को धन्यवाद। आईएफसी,
जोनाथन सेहरिंग, जॉन स्लॉस, केथलीन सदरलैंड, मॉली मेडेन, डेविड डीकैमिलो, हमारी पूरी कास्ट और क्रू को धन्यवाद। 
मेरे ब्वॉयहुड परिवार, जिसे मैं लाड़ और प्यार करती हूं। हमारे अद्भुत निर्देशक रिचर्ड लिंकलेटर। अविश्वसनीय एथन हॉक। मेरे प्यारे एलर कोलट्रेन, लॉरलेई लिंकलेटर, थॉमस और पॉल, आपको मुझे मेरे प्यारे बच्चों से मिलवाने के लिए धन्यवाद। एन्ज़ो और हॉर्लो, आप मेरे परिचित, सबसे गहन विचारशील लोगों में से हैं। मेरे मित्र, जो इस दुनिया को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाने में मदद करते हैं। मेरे अभिभावक रोज़ाना, रिचमंड, एलेक्सिस और डेविड को भी धन्यवाद।
मेरे सबसे पसंदीदा पेंटर, एरिक व्हाइट को, श्रेष्ठता के साथ जीने की प्रेरणा के लिए धन्यवाद। मेरे नायकों, स्वयंसेवकों और विशेषज्ञों का आभार, जिन्होंने विकासशील विश्व के लिए पर्यावरणीय स्वच्छता के लिए गिवलव.ओर्ग की सहायता की। 
उस हर महिला का आभार, जिसने इस देश के प्रत्येक नागरिक और करदाता को जन्म दिया। हम ने अन्य सभी के समान अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। अब हमारे लिए यह समय है कि आय की समानता हासिल की जाए एवम् संयुक्त राज्य अमेरिका में महिलाओं के समान अधिकारों के लिए लड़ाई की जाए। " 






अनुवाद और संकलन - मयंक




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Tuesday, February 24, 2015

बर्डमैन....Oscar Best Picture - 2015...The unexpected virtue of Film-Making...


Birdman or (The Unexpected Virtue of Ignorance)

बर्डमैन का पोस्टर
नाम पढ़ते ही उत्सुकता हो जाती है इस फ़िल्म के बारे में...ऑस्कर की दौड़ में कई उम्दा फिल्मों को पछाड़ कर इस फ़िल्म ने सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का ऑस्कर जीता। आखिर क्या खास था इस एकदम अलग नाम वाली फ़िल्म में? 
ये बात करने से पहले बात करते है बाकी फिल्मों की,



American Sniper
2015 के सर्वश्रेष्ठ फिल्म के ऑस्कर नामांकन
नामांकित फिल्मों में सबसे ज्यादा कमाने वाली और शायद सबसे ज्यादा विवादास्पद और बाक़ी फिल्मों में से सबसे कमज़ोर। इसके ना जीतने के बहुत से कारण है, जिनमे सबसे बड़ा कारण है इसका युद्ध फ़िल्म होना। युद्ध फ़िल्में ऑस्कर की पसंदीदा रही है, लेकिन इस फ़िल्म में भी वही सब था जो सेविंग प्राइवेट रयान और प्लाटून में था। युद्ध का असर सैनिक पर और उसके बाद उसे देश का हीरो बना देना। सिनेमा की भाषा में कहे तो अमेरिकन स्नाइपर अमेरिकी राष्ट्रवाद का क्लीशे थी।

Boyhood
रिचर्ड लिंकलेटर जिनकी हर फ़िल्म में कुछ नया होता है और boyhood तो उन सब में सबसे खास थी। 12 साल तक हर महीने शूट करना और एक-एक कलाकार का अभिनय। इस फिल्म में वक़्त के साथ अलग-अलग उम्र के अभिनेताओं से काम लेने की जगह, उन्हीं अभिनेताओं के साथ 12 साल तक लगातार, एक ही कहानी को शूट किया गया। Boyhood सिर्फ एक फिल्म नहीं एक डायरी की तरह थी, जिसमे हम सबके बचपन से लेकर लड़कपन की कहानी थी। Birdman को सबसे कड़ी टक्कर देने वाली फ़िल्म अगर कोई थी, तो वो थी Boyhood।
इसके ना जीतने का एक ही कारण हो सकता है, कि ये उन्नीस नहीं थी पर Birdman इक्कीस थी जो दर्शकों और जूरी को एक अलग ही दुनिया में ले गयी।

Theory of Everything
इस फ़िल्म में वो सब कुछ था जो इस से पहले बनी बायोपिक में था। सबसे नज़दीकी फ़िल्म थी डेनियल डे लेविस की My Left Foot जिसके लिए डेनियल को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ऑस्कर मिला और जैसा कि Eddie Redmayne को इस फ़िल्म के लिए मिला। फ़िल्म में कोई कमी नहीं थी वैसी ही थी जैसी बायोपिक होनी चाहिए लेकिन इस फ़िल्म का स्तर American Sniper से ऊपर होने के साथ इसकी समस्या भी वही थी, बायोपिक क्लीशे...

The Imitation Game
ऑस्कर नामांकित सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में नंबर तीन। एलान टूरिंग की बायोपिक...अभिनय से लेकर निर्देशन तक लाजवाब। इस फ़िल्म के बारे में यही कहना है की ये उन उम्दा फिल्मों में से है, जिन्हें जूरी अनदेखा करती है।

SELMA 
ये एक ऐसी फ़िल्म थी, जिसे सिर्फ इसलिए नामांकित किया गया था की जूरी पर रंगभेद के आरोप ना लगे। हर तरह से औसत फ़िल्म। निर्देशन, अभिनय और एडिटिंग सब कुछ औसत। ये फ़िल्म बताती है कि असल जिंदगी से मिलती जुलती शक्ल वाले अभिनेताओं को लेने से अभिनय उस दर्जे का नहीं हो जाता। इस फ़िल्म में अगर कोई अच्छी बात थी तो वो थी GLORY  शीर्षक का एक गीत।
बर्डमैन का रेखाचित्र

WHIPLASH 
कौन कह सकता है की ये फ़िल्म एक नये निर्देशक की पहली फ़िल्म है? शुरू से आखिर तक बांधे रखने वाली,
SIMMONS का अद्भुत अभिनय। पार्श्व संगीत और एक उम्दा कहानी, जो कहीं बोर होने नहीं देती है। ये फ़िल्म कमज़ोर पड़ी तो बस एक मामले में, वो है कि इस तरह की फ़िल्में ऑस्कर फेवरेट नहीं होती और दूसरा कारण है BIRDMAN ।

BIRDMAN ने सिनेमा की एक विधा भी नहीं छोड़ी जिसमे वो कमजोर पड़ी हो

THE GRAND BUDAPEST HOTEL
एक खूबसूरत पेंटिंग अगर परदे पर जीवंत हो उठे तो वो भी शायद इस फ़िल्म जितनी खूबसूरत नहीं दिखेगी। एक एक फ्रेम, किसी पेंटिंग से कम नहीं है। WES ANDERSON की दुनिया में, रंगो से कैसे खेला जाता है ये शायद उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। लेकिन ये फिल्म ना केवल तकनीकी रूप से कमाल की है बल्कि अभिनय निर्देशन संगीत हर मामले में बेमिसाल है। इस फ़िल्म के पिछड़ने का सिर्फ और सिर्फ एक कारण है, जो है इसका कॉमेडी फिल्म होना।

और अब आखिर में इस साल की विजेता

BIRDMAN

बर्डमैन के एक दृश्य में माइकल कीटन
Alejandro González Iñárritu द्वारा लिखी और निर्देशित की हुयी BIRDMAN एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। एक भुला दिए अभिनेता की तड़प वापस अपनी पहचान बनाने के लिए...जो आज भी अपने बीते हुए कल से लड़ रहा है। MICHAEL KEATON का अद्भुत अभिनय और अल्फ्रेड हिचकॉक की ROPE के बाद शायद पहली बार इतना उम्दा कैमरा वर्क और एडिटिंग। ऐसा लगता है की पूरी फ़िल्म एक शॉट में शूट की गयी है। जैसे जैसे Keaton का किरदार चलता है उसके साथ साथ दर्शक भी, फ़िल्म की लय में बहता जाता है। अगर Grand Budapest Hotel सेल्युलाइड पर पेंटिंग है, तो ये फ़िल्म एक ऑर्केस्ट्रा है जो धीरे धीरे गति पकड़ता है और दर्शक को उस लेवल पर ले जाता है जहाँ BIRDMAN और दर्शक एक हो जाते है।  Alejandro González Iñárritu ने मेटाफोर्स और सिम्बोलिस्म का बेहतरीन इस्तेमाल किया है और Keaton से उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ अभिनय कराया। उनके अलावा हर एक सपोर्टिंग कास्ट का अभिनय भी अव्वल दर्जे का था
चाहे वो Emma Stone हो या Edward Norton।
ये फ़िल्म जीते गए चारोँ ऑस्कर तो डीजर्व करती थी पर उसके अलावा बेस्ट एडिटिंग में भी ऑस्कर जीतने लायक थी, जो इसे नहीं मिला।
और अंत में
अगर SELMA की जगह NIGHTCRAWLER को नामांकित किया जाता तो मुकाबला कुछ और दिलचस्प होता...


योगेश पारीक

इस ब्लॉग के लेखक, योगेश पारीक एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, जो अब पूर्णकालिक फिल्म दर्शक हैं। योगेश फिल्में देखते, ओढ़ते और बिछाते हैं...उसके अलावा न तो कोई बात करते हैं और न ही सुनते हैं। इनसे charlie.alreich@gmail.com या फिर https://www.facebook.com/charlie.alreich?fref=ts पर सम्पर्क कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे...सिर्फ फिल्मों की ही बात करें...ज़्यादा फालतू बातें इन्हें पसंद नहीं!




चलिए लगे हाथ बर्डमैन का ट्रेलर भी देख लीजिए....


83वां ऑस्कर, 2015...(2) द ग्रैंड बुडापेस्ट होटल - रंग, संगीत, दृश्य और जादू...




द ग्रैंड बुडापेस्ट होटल इस साल 4 ऑस्कर जीतकर बर्डमैन के साथ पहले नंबर पर रही है। फिल्म देख चुके लोग जानते हैं कि वो इससे भी ज़्यादा अवार्ड डिज़र्व करती थी। बहरहाल बात करते हैं कि फिल्म ने किन श्रेणियों में ऑस्कर जीता। वेस एंडरसन की द ग्रैंड बुडापेस्ट होटल ने बेस्ट प्रोडक्शन डिज़ाइन, बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइन, बेस्ट मेकअप एंड हेयरस्टाइलिंग और बेस्ट ऑरिजनल स्कोर का अवार्ड जीता । फिल्म देखते हुए आप सहज़ अंदाज़ा लगा सकते हैं कि फिल्म को इन श्रेणियों में इस साल कोई पछाड़ ही नहीं सकता था। पूरी फिल्म ऐसी है मानो किसी ने कैनवास पर खूबसूरती के साथ रंग छिटका दिए हों। कानों में मिठास घोल देनेवाले संगीत के साथ आपको फिल्म किसी खूबसूरत यात्रा की तरह लग सकती है।
एडम स्टॉकहौसेन और एना पिनॉक
फिल्म की शूटिंग जर्मनी में की गई है। ज़ाहिर है कि फिल्म द्वितीय विश्वयुद्ध के आसपास बुनी गई है तो सैट और कलाकारों के लुक पर मेहनत होती ही । लिफ्ट से लेकर होटल और आलीशान घर से लेकर ट्रेन तक आप प्रोडक्शन डिज़ाइनर एडम स्टॉकहौसेन और सेट डेकोरेटर  एना पिनॉक की मेहनत देख सकते हैं। दोनों ने पहली बार ऑस्कर जीता है। इससे पहले स्टॉकहौसेन के काम को फिल्म 12 years a slave के लिए भी खासी तारीफ मिली थी और वे बेस्ट प्रोडक्शन डिज़ाइन की श्रेणी में नॉमिनेट भी हुए थे। अपने करियर की शुरूआत न्यूयॉर्क के थिएटरों में बतौर इलैक्ट्रीशियन करनेवाले स्टॉकहौसेन ने प्रोडक्शन डिज़ाइनिंग की दुनिया में एक अलग मुकाम  हासिल कर लिया है। एना पिनॉक के काम को भी Life of Pie में खासी तारीफें हासिल हुई थी।
द ग्रैंड बुडापेस्ट होटल के हर दृश्य में आप आसपास के माहौल को महसूस करते हैं। खासतौर पर फिल्म की तासीर के मुताबिक रंगों का चयन आपको हैरान करता चलता है। यही शानदार काम कलाकारो की कॉस्ट्यूम के मामले में भी जारी रहा। द ग्रैंड बुडापेस्ट होटल का मुकाबला इस श्रेणी में Inherent Vice, Into the Woods, Maleficent, Mr. Turner से था। इटली की कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर मिलेना कॉनिनेरो ने अपने शानदार काम की बदौलत चौथी बार ऑस्कर जीता। महान डायरेक्टर स्टेनले कुब्रिक की फिल्मों में अपने काम से चर्चा में आई मिलेना की रंग-बिरंगी कॉस्ट्यूम्स का जादू सिर चढ़कर बोला। कॉमेडी फिल्म होने के नाते मिलेना का काम वाकई बढ़ गया था।  एक किरदार मैडम डी की खूबसूरत ड्रेस को तो दर्शक फिल्म के बाद भी याद रखते हैं।
बेस्ट मेकअप एंड हेयरस्टाइलिंग का ऑस्कर भी द ग्रैंड बुडापेस्ट होटल के खाते में ही आया है। फ्रांसिस हेनन और मार्क कूलिर का ये पहला ऑस्कर था। 54 साल की टिल्डा स्विन्टन को 83 साल की मैडम डी बनाने के लिए उन्होंने घंटों मेकअप किया और शरीर पर 11 जगह प्रोस्थेटिक मेकअप का प्रयोग किया।
जैसा कि पहले ही ज़िक्र हुआ फिल्म कैनवास पर उभरती तस्वीर जैसी है लेकिन बैकग्राउंड में एलेक्ज़ेंडर डेस्प्लेट के संगीत ने तो जादू ही छिड़क दिया। एलेक्ज़ेंडर की एक फिल्म The Imitation Game भी इस श्रेणी में नॉमिनेट हुई थी।
बहरहाल मलाल इस बात का है कि द ग्रैंड बुडापेस्ट होटल को बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट सिनेमाटोग्राफी का ऑस्कर नहीं मिल सका। दरअसल इसके पीछे एक वजह ये भी रही कि Birdman को साल के आखिर में सीमित थिएटर्स में रिलीज़ करके ऑस्कर की नॉमिनेशन पा ली गई। इसी तरह Whiplash,Mr.Turner और American Snipper को भी साल के अंत में सीमित थिएटर्स में रिलीज़ कर दिया गया। निश्चित ही ऐसा ना होता तो कई और श्रेणियों के ऑस्कर पर भी द ग्रैंड बुडापेस्ट होटल का कब्ज़ा होता।

फिल्म का ट्रेलर





नितिन ठाकुर

लेखक, टीवी पत्रकार रहे हैं, प्रिंट और वेब के लिए भी लिखते हैं। फिलहाल स्वतंत्र और आवारा हैं। फेसबुक पर आधी रात की ख़ब्त के नाम से चर्चित रहे और इसी नाम का ब्लॉग भी लिखते हैं। इन से https://www.facebook.com/nitin.thakur009 अथवा thakurgalaxyy@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है। 

Monday, February 23, 2015

और ये रहे 83वे ऑस्कर (अकादमी) अवॉर्ड्स... (1) Theory of Best Acting in Lead Role...

हमारी पीढ़ी ने स्टीफ़न हॉकिंग को न केवल देखा है, बल्कि सुना और पढ़ा भी है और हम हैरान होते रहे कि कैसे ALM यानी कि Amyotrophic Lateral Sclerosis से ग्रस्त एक शख्स, जो न बोल सकता है, न चल सकता है बल्कि शरीर के ज़्यादातर हिस्सों से लाचार है...वह ब्रह्मांड के सबसे गहरे रहस्य एक के बाद एक सुलझाता जा रहा है। लेकिन हम ने स्टीफन हॉकिंग को हमारे वक़्त में देखा, वह वक़्त जब वो विशेष रूप से बनाई गई डिजिटल व्हील चेयर और वॉइस एड के सहारे हम से बात करने लगे थे और हम उन्हें देख कर हैरान हो रहे थे। हम में से कुछ ने उनकी उस से पहले की ज़िंदगी के बारे में उनकी पूर्व पत्नी जेन वाइल्ड हॉकिंग के संस्मरण के बारे में जान कर शायद ढेर सारे शब्द चित्रों को अपनी कल्पनाओं में आकार दिया होगा। लेकिन दरअसल वह काफी नहीं था, क्योंकि हमारी दुनिया को उसके सबसे गहरे रहस्यों के प्रवेश द्वार पर ला कर खड़ा कर देने वाले इस महानतम वैज्ञानिक को जानना बहुत ज़रूरी था। और फिर साल 2014 में 7 सितम्बर को टोरंटो में दुनिया के सामने आई, स्टीफन हॉकिंग की ज़िंदगी के पीले पन्नों और जवानी में ही गंभीर तंत्रिका रोग से ग्रस्त हो, चलने-फिरने, यहां तक कि बोलने से भी मोहताज हो जाने वाले शख्स की जिजीविषा, जीवन, प्रेम और संघर्ष के साथ सफलता की कहानी। एक ऐसी कहानी, जो असली से भी ज़्यादा असली थी। हालांकि पहली बार इस फिल्म को देखते हुए, मेरे मन में एक औसत सा भाव था, कि चलो ठीक फिल्म है। लेकिन एक रात बिस्तर पर लेटे हुए, मैं सोचने लगा कि आखिर इस फिल्म को मैंमे बेमन से ही देखा था, एक बार और देखते हैं...और दोबारा फिल्म देखते समय मुझे अहसास हुआ कि कैसे कई बार निर्देशन औसत होने पर भी एक अभिनेता सिर्फ अपने कंधों पर रख कर पूरी फिल्म को एक जीवन में बदल देता है। 
स्टीफन हॉकिंग के किरदार में एडी
निश्चित रूप से चूंकि अब जब एडी रेडमायन के हाथ में अकादमी पुरस्कार की ट्रॉफी है, तो उनको वह श्रेय मिलना चाहिए जिसके वह हक़दार हैं, उन पर बात होनी चाहिए कि आखिर कैसे उन्होंने स्टीफन हॉकिंग की यह भूमिका इस कदर जीवंत कर दी कि स्टीफन हॉकिंग को इस फिल्म के लिए अपनी सिंथेसाइज़्ड आवाज़ देने के लिए मजबूर होना पड़ा। ये एडी की अदाकारी का ही कमाल था कि इस फिल्म को देख कर हॉकिंग भी अपने पुराने वक़्त में खो गए। फिल्म की कहानी एक कैम्ब्रिज के एक युवा शोधकर्ता के इर्द गिर्द घूमती है, जो आगे जा कर अपने अहम शोध के ठीक वक़्त अपने स्नायु तंत्र पर नियंत्रण ही खो बैठता है। डॉक्टर बताते हैं कि अब धीरे-धीरे उसका शरीर उसके काबू से बाहर हो जाएगा और एक-एक कर के सारे अंग शिथिल होते जाएंगे। उसके रोगग्रस्त शरीर और स्वस्थतम मस्तिष्क का पहले उसकी प्रेमिका से विवाह होता है और बाद में अकेलेपन के के वक्त वह फिर से अपना जीवनसाथी चुनता है...अपनी नर्स को...इस संस्मरण को हॉकिंग की पहली पत्नी ने ही लिखा है। आप अगर सिर्फ मनोरंजन ढूंढने जाएंगे तो फिल्म से आप निराश हो जाएंगे लेकिन अगर आप एडी रेडमायन को देखेंगे, आप उनके फिल्म के हर दृश्य के साथ बदलती भंगिमा को देखेंगे, उनके चेहरे के भाव देखेंगे और देखेंगे उनकी आंखों को कि एक वैज्ञानिक जो दुनिया के सबसे बड़े सिद्धांत को प्रतिपादित करने में जुटा है, वह कैसे अपने मस्तिष्क के भी काम करना बंद कर देने से पहले सिर्फ ये जानना चाहता है कि उसकी वैज्ञानिक मान्यता सच है या नहीं और अंततः वह अपने आप को सिद्ध करता है। 
फिल्म - द थ्योरी ऑफ़ एवरीथिंग
इस फिल्म में स्टीफन हॉकिंग के सिद्धांत नहीं, उस शख्स को आवाज़ दे दी गई है, जो हर तरह से हार मान लेने को अभिशप्त हो चला था लेकिन फिर भी उसने अपने और दुनिया के लिए वह हासिल किया, जो उसे करना था। एडी रेडमायन फिल्म के मध्य तक आते-आते, साबित कर देते हैं कि 33 साल के इस युवा के लिए अभिनय केवल अभिनय करना नहीं है, किरदार को इस गंभीरता से जीना है, जिस गंभीरता से शायद वह अपना जीवन भी नहीं जी रहा है। दरअसल अभिनय का मूल यही है कि किरदार के सुख-दुख और आकांक्षाओं को अनुभव कर लेना...उसे संवाद से कम और भावों से अधिक अभिव्यक्त करना और शायद हमारी फिल्मों में अभी भी यह लक्ष्य हासिल करना बाकी रह गया है। 
अकादमी पुरस्कार के साथ एडी रेडमायन
इस पुरस्कार के लिए एडी का बर्डमैन के माइकल कीटन और फॉक्स कैचर के स्टीव कैरेल से था। माइकल कीटन के अभिनय की तो हर ओर तारीफ हो ही रही है, लेकिन फॉक्स कैचर में अभी तक एक स्टैंड अप कॉमिक के तौर पर जाने जाते रहे स्टीव कैरेल ने शायद हॉलीवुड के इतिहास का सबसे मुश्किल गंभीर किरदार निभाया है। ख़ैर मेरी पसंद स्टीव कैरेल ही थे, लेकिन एडी के काम से इनकार करना भी अन्याय ही होगा। 

एडी रेडमायन ने करियर की शुरुआत थिएटर से की, वह भी शेक्सपियर द्वारा स्थापित किए गए ग्लोब थिएटर से और थिएटर अभिनेता के तौर पर न जाने कि कितने पुरस्कार हासिल किए। ज़ाहिर है कि अभिनय का यह मूल सबक उनको थिएटर से मिला है। यह फिल्म देखना ज़रूरी है...स्टीफन हॉकिंग के लिए...हमारी दुनिया के लिए...और यह जानने के लिए कि अगर अभिनय वाकई कोई कला है तो उसे उत्कृष्टता तक पहुंचाना, किस प्रकार एक अहम इंसानी उपलब्धि है और दुनिया को कला और विज्ञान कैसे बदल सकते हैं इसलिए भी...इस फिल्म को देख कर समझिए कि खून बहाती दुनिया के बीच, क्या है जो सार्थक है और अगर कला न होती, तो मानवता का क्या होता...और विज्ञान न होता...तो कलाएं कब की ख़त्म हो जाती...फिलहाल एडी रेडमायन को मुबारकबाद और साथ ही यह भी..."दोस्त, आप ने शानदार काम किया...लेकिन मैं जानता हूं कि आखिर तक आप को कीटन और कैरेल से डर लगता रहा होगा...आपकी खुशी और हंसी से यह साफ था...!"

लेख - मयंक सक्सेना

लेखक अतीत में रेडियो और टीवी के पत्रकार रहे हैं, फिलहाल स्वतंत्र लेखन और अनुवाद करते हैं। फिल्मों के कीड़े हैं और व्यंग्य लेखन की कोशिशें करते रहते हैं। 
Writer has been a TV-Radio Journalist but now is a freelance writer and translator. Pretends to be a satirist and indeed is a Cinema Worm! 
Can be contacted at - mailmayanksaxena@gmail.com



    

Sunday, February 22, 2015

Whiplash - A love triangle between an Art Form and Two of its followers... व्हिपलैश - संगीत, पीड़ा, प्रेम और संगीत...




2014 में अमेरिका में लिमिटेड रिलीज़ के साथ आई व्हिपलैश, इस साल की सबसे चर्चित फिल्म होने वाली है, क्योंकि ये इस साल ही पूरी तरह और सब जगह रिलीज़ हुई है। इस फिल्म की पिछले साल सीमित रिलीज़ हुई थी, लेकिन समीक्षकों ने इसे 4 से 4.5 तक रेटिंग दी थी, जबकि इसकी IMDB पर रेटिंग, 10 में से 8.6 और Rotten Tomatoes पर 95 फीसदी है। व्हिपलैश एक संगीत के छात्र एंड्र्यू नीमेन और उसके गुरु टेरेंस फ्लेचर की कहानी है, एंड्र्यू ड्रमर बनना चाहता है और उसका गुरु बेहद गुस्सैल है। फिल्म 5 ऑस्कर/अकादमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकित हुई है। कहानी कहां ले जाती है इसके लिए फिल्म देखिएगा, लेकिन फिल्म देख कर लौटे हमारे साथी अनंत चौधरी ने जो एक त्वरित टिप्पणी की है...वो आप के सामने है...
Film - Whiplash (व्हिपलैश)
Director - Damien Chazelle (डेमियन शैज़ेल)
Cast (अदाकार)
Andrew Neiman (एंड्र्यू नीमेन) -  Miles Teller (माइल्स टेलर)
Terence Fletcher (टेरेंस फ्लेचर) - J. K. Simmons (जे के सिमन्स)

और अब जो अनंत ने फिल्म देख कर लिखा...

A love triangle between an Art Form and Two of its followers
Blacked out screen and you start hearing the slow invigorating drum roll, setting your expectations in the opening scene. Camera chases the beats through a long dark-so American institution alley panning on Miles Teller as Andre Neiman. He is meek, antisocial, ambitious, brimming with talent and with no musical legacy. This unpolished glob of an artist is recognized by the most prestigious professor at institution Terence Fletcher. This is where the dream and the nightmare entwine for Neiman. Fletcher is beyond obsessed with perfection, a true believer in the theory of negative motivation in his journey to push the envelope for his pupil,
Ok yes we have seen many Mentor Mentee relationships based stories. What’s new?


Well, for a musical genre drama the movie is surprisingly fast paced. Blood rolling on the drum sets, sweaty drumsticks, about to burst veins, hurling chairs and objects, homophobic curses, stolen music notes are just a few things to earn your place in the band.
Bald and clad in black JJ Simmons as Fletcher is leaving no stones unturned and even hurling the stones at Neiman in pursuit of that perfect rhythm. The character is dangling on the very fine line of obsession and sadism giving the entire story line a heightened sense of tension.
It’s a love triangle between an art form and two of its followers meandering through the forlorn by alleys of complex characters, obsessed artists, sadist outbursts and seldom exalted musicians.




Anant is a Management Professional, based in Bengaluru.
(अनंत चौधरी से आप फेसबुक पर https://www.facebook.com/anant.chaudhary.92?fref=ts पर अथवा auster.shines@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं।)

प्रीमियर...Premier....

फिल्मों और सिर्फ फिल्मों को समर्पित इस ब्लॉग को आज हम आप को समर्पित कर रहे हैं...इस ब्लॉग पर अलग अलग फिल्मी कीड़ों की आवाज़ें होंगी...लेकिन हम गॉसिप नहीं करेंगे...हम सिर्फ दुनिया भर की किसी भी फिल्म पर आप से बात करेंगे...हम फिल्मों पर व्यंग्य करेंगे...मज़ाक उड़ाएंगे...तारीफ़ करेंगे...तकनीकी विश्लेषण करेंगे...आप को बताएंगे कि कौन सी फिल्म आप के लिए है...कौन सी नहीं...कौन सी फिल्म आप ने नहीं देखी...कौन सी देखनी चाहिए...और कौन सी नहीं...साथ ही आप जो कहते हैं, वह भी हमारे लिए ब्लॉग पोस्ट होगी...
तो दर्शकों...पाठकों...श्रोताओं...आज इस ब्लॉग यानी कि Mean-मेख के प्रीमियर के साथ ही ये रिलीज़ होता है...आज शुरुआत होगी इस हफ्ते रिलीज़ हुई दो फिल्मों के साथ...जिनमें से पहली है अंग्रेज़ी फिल्म व्हिपलैश...जो कि ऑस्कर के लिए नामांकित है...और फिर हम बात करेंगे, हिंदी फिल्म बदलापुर के बारे में...हां, याद रहे...ये ब्लॉग सबके लिए है...हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों पाठकों के लिए....आइए, फिल्मों को अलग नज़रिए से देखते हैं...इसी लिए हमारी पंचलाइन है...श्वेत श्याम...No Eastman Colour...Only Black and White!

किसी ने कहा था...

Photography is truth. The cinema is truth twenty-four times per second.
फोटोग्राफी सत्य है। सिनेमा, सच के 24 फ्रेम प्रति सेकेंड हैं।
जीन-लुक गोदार्द